भगवान किसे कहते हैं, जानिए… (हिंदी में)

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जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें शिद्दत से सुधार की जरूरत है!
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हिन्दू घरों में बचपन से Bhagwan (हिंदी में-भगवान) और देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करना सिखाया जाता है। परन्तु बड़े हुए बहुत से लोग ये नहीं जानते कि भगवान कहा किसे जाता है? इस शब्द का शुद्ध रूप क्या है? हिन्दी में भगवान शब्द को गलत तरीके से लिखा जाता है। शुद्ध रूप से इस शब्द को भगवान् लिखना चाहिए। परंतु Web पर ‘भगवान’ शब्द ही Search किया जाता है, तो यहां हम अपनी बात में इसी का प्रयोग करेंगे।

विचारों और पूजा पद्धति को सीखते आप बड़े होते हैं। बड़े होने पर आपकी तर्कशीलता भी बड़ी हो चुकी होती है, लेकिन जिस मन के अंदर इस तरह के संस्कारिक बीज़ बचपन में डाल दिये जाते हैं, वही बड़े हो कर कर्मकांडी बन जाते हैं। तार्किकता यहाँ काम नहीं करती क्योंकि भक्ति रस अब रोम-रोम में बस चुका होता है। सभी इसी तरह अलग-अलग तरीके से धर्म से जुड़े हुए कर्मकांड सीखते हुए बड़े होते हैं।

भगवान शब्द की परिभाषा और पात्रता मापदंड

अब जानिए भगवान किसे कहा जाता है? : दरअसल Bhagwan संस्कृत के भगवत शब्द से लिया गया है। भगवान का हिंदी में अर्थ होता है- जितेंद्रिय। ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी पांचों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो या जिसकी पंचतत्वों पर पकड़ हो उसे Bhagwan कहते हैं। जो व्यक्ति पूर्णत: मोक्ष प्राप्त कर चुका हो और अपने जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर कहीं भी जन्म लेकर कुछ भी करने की क्षमता रखता हो वह ही Bhagwan है।

जैन धर्म में कैवल्य ज्ञान को प्राप्त व्यक्ति को तीर्थंकर या अरिहंत कहते हैं। बौद्ध संबुद्ध कहते हैं वैसे ही हिन्दू भगवान कहते हैं। Bhagwan शब्द का उपयोग विष्णु और शिव के अवतारों के लिए किया जाता है। इस शब्द का स्त्रीलिंग भगवती होता है। भगवती शब्द का उपयोग माँ दुर्गा के लिए भी किया जाता है। इसे ही भागवत मार्ग कहा गया है।

पाली भाषा में कहा जाता हैं कि भगवान “भंज” धातु से बना है जिसका अर्थ होता है:- तोड़ना।
जो राग, द्वेष,और मोह के बंधनों को तोड़ चुका हो अथवा भाव में पुनः आने की आशा को भंग कर चुका हो भावनाओ से परे जहाँ सारे विचार शून्य हो जाये और वहीँ से उसकी यात्रा शुरु हो उसे भगवान कहा जाता है।

भगवान शब्द हिंदी में अर्थ

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भगवान गुण वाचक शब्द है जिसका अर्थ गुणवान होता है। यह “भग” धातु से बना है, भग के 6 अर्थ है:-
1-ऐश्वर्य
2-वीर्य
3-स्मृति
4-यश
5-ज्ञान
6-सौम्यता

कहते हैं कि जिसके पास ये 6 गुण है वही भगवान होता है।

भगवान शब्द का सन्धि विच्छेद

भगवान शब्द पांच तत्वों से मिल कर बना है। इसका हिंदी में सन्धि विच्छेद होता है-
(भ् + अ + ग् + अ + व् + आ + न् + अ) यानि कि-
भ = भूमि
अ = अग्नि
ग = गगन
वा = वायु और
न = नीर

यहाँ सबसे खास ध्यान देने वाली बात जिस में लोग भेद नहीं कर पाते हैं, बस मानने में विश्वास रखते हैं। जबकि धार्मिक व्यापार का सारा खेल इसी पर टिका है। वो Bhagwan को ईश्‍वर तुल्य समझते हैं इसीलिए यह शब्द ईश्वर, परमात्मा या परमेश्वर के लिए भी उपयोग किया जाता है, लेकिन यह उचित नहीं है। भगवान का अर्थ ईश्वर नहीं होता, जितने भी Bhagwan हैं वे ईश्वर कदापि नहीं है। राम, कृष्ण और बुद्ध आदि ईश्वर नहीं थे। और यहाँ तक कि ब्रहमा, विष्णु, महेश भी ईश्वर नहीं हैं, ईश्वर या परमेश्वर सिर्फ संसार की सर्वोच्च सत्ता को कहा जाता हैं। और कड़वा सच यह है कि जिसके बारे में आज भी किसी को कुछ पता नहीं है।

भगवान कहां मिलेंगे?

क्या Bhagwan का कण-कण में वास होता है?

यहां ऊपर बताई गयी बातें अगर आपने पढ़ ली होंगी तो कण-कण में भगवान हैं! इस भ्रम को आप समझ गए होंगे। आइये इसे थोड़ा और विस्तार से समझते हैं।

सनातन धर्म में बहुत पुराना Concept था कि ‘कण-कण में भगवान व्याप्त हैं’। काफी पहले इस पंक्ति पर फिल्म वालों ने ‘कण-कण में भगवान’ नाम की एक पूरी फिल्म बना डाली थी। लगता इस पंक्ति से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हो जाती होंगी इसलिए अब यह Concept ज्यादा प्रचलन में नहीं है।

चूंकि इस Concept को अन्य धर्म वाले यह मानने को तैयार नहीं होते होंगे कि दूसरे धर्म वालों के घरों, पूजास्थलों में भगवान का वास भी हो सकता है। तो अन्य धर्म के मानने वाले दुनिया के ज्यादातर कणों में भगवान का अस्तित्व मानने को तैयार नहीं होते होंगे। अब इसमें जाति, वर्ण, नस्ल, राष्ट्रीयता को भी जोड़ लें, तो फिर इस दुनिया के किसी भी कण में Bhagwan को जगह नहीं मिल सकती है, जबकि दावा सब का यही रहता है कि भगवान का असली आश्रय उसी के पास है। यह वाकई आश्चर्यजनक है…

क्या भगवान आश्रयदाता हैं?

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यह आइडिया आजकल ज्यादा लोकप्रिय नहीं है कि Bhagwan सबके आश्रयदाता हैं। अब तो लोगों का दावा यह है कि वे Bhagwan को आसरा दिए हुए हैं। अगर वे आसरा न देते, तो न जाने Bhagwan का क्या होता। लोग Bhagwan के लिए मुकदमा लड़ते हैं, उनके वकील हो जाते हैं कि अगर Bhagwan को जगह न मिली, तो वे कहां जाएंगे? अब असलियत क्या है, यह तो Bhagwan ही जानें?

क्या भगवान भी बीमार होते हैं?

अक्सर ऐसी खबरें आपने भी पढ़ी होंगी जिसमें फलां भगवान बीमार हो गये,  उन्हें ठंड लग गई या गर्मी लग रही, डॉक्टर ने स्टेथस्कोप लगा कर उन्हें चेक किया, अब उनका इलाज चल रहा वगैरह… वगैरह…

किसी के भी मन में यह सब देख कर प्रश्न उठ सकता है, कि यह कैसे पता चलता है कि भगवान को कब गर्मी लग रही? कब सर्दी लग रही? कब उनकी हार्टबीट नार्मल नहीं? और कब उनकी तबियत खराब हो गई? जिज्ञासा स्वाभाविक है।

जिस भगवान को खुद सर्दी-गर्मी या बीमारी से बचने के लिए इंसानों के मदद की जरूरत पड़ रही है। वह किस तरह इतने सारे भोले इंसानों का कष्ट दूर कर पाएंगे?

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