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Gehraiyaan 2022 Movie Review Hindi

जरूर पढ़े!

Blogger DG
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जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें शिद्दत से सुधार की जरूरत है!

सेक्स एजुकेशन पर गहरी बात कर गई दीपिका की ‘Gehraiyaan Movie’

निर्देशक- शकुन बत्रा

निर्माता- धर्मा प्रोडक्शन

Gehraiyaan Cast- दीपिका पादुकोण, सिद्धान्त चतुर्वेदी, अनन्या पांडे, धैर्य करवा, रजत कपूर, नसरुद्दीन शाह

संगीत- कबीर कठपालिया

ओटीटी- अमेज़न प्राइम वीडियो

आज की रेटिंग- 6.5/10 (IMDb)

क्या आपने Gehraiyaan Movie देखी है?

यह क्यों ख़राब लगी आपको? अपने किसिंग सीन्स की वजह से? या रिश्तों में धोखेबाज़ी की वजह से?

आपका अपना मत हो सकता है लेकिन मुझे यह फ़िल्म ईमानदार लगी। देखने के बाद मन भारी हो गया, फ़िल्म में सकारात्मक कुछ नहीं था लेकिन क्या वो हक़ीक़त से दूर है? बिल्कुल नहीं! क्या हमने अपने आस-पास विवाहेतर संबंध (एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर्स) नहीं देखे? देखे ही होंगे। एक ही घर में संबंध, देवर-भाभी का आपसी आकर्षण… बहुत आम घटना रही है, इस पर बात करना आम नहीं रहा है। कानाफूसी करके ये बातें की जाती हैं, लेकिन हमारे समाज में ये बातें होती रहीं हैं, रिश्ते पनपते रहे हैं।

रिश्तों में धोखेबाज़ी पहली बार देखी है? कोई ऐसा नहीं मिला जिसने आपके विश्वास को रौंद दिया हो और ज़िंदगी से भरोसा उठ गया हो तो क़िस्मतवाले हैं आप! अलीशा को अपने उस बॉयफ़्रेंड के साथ क्यों रहना चाहिए जो बिल्कुल ग़ैर ज़िम्मेदार हो और उसका सम्मान तक न करता हो। When respect isn’t served, you should leave the table! हाँ, ऐसे में ज़ैन के साथ जाने को आप ग़लत कह सकते हैं लेकिन ज़ैन ने ख़ुद अप्रोच किया, अलीशा उस वक़्त Vulnerable थी। ऐसी स्थिति में ऐसे फ़ैसले लेना क्या मानवीय व्यवहार नहीं है?

ज़ैन वाकई अलीशा के साथ रहना चाहता था लेकिन उसका काम ऐसा उलझा कि सब उलझता गया और फिर दोनों के बीच जो खटास आयी वह स्थिति के कारण थी। टिया ईमानदार रही लेकिन अलीशा और टिया के अलग-अलग हालात उनके व्यवहार के लिये ज़िम्मेदार नहीं हैं?

आपको Gehraiyaan Movie में सिर्फ़ किसिंग सीन्स दिखे। ख़राब रिश्ते ज़िन्दगी को कितना और किस हद तक उलझा देते हैं, यह भी ध्यान देने वाली बात थी। इन सबसे उपजे फ़्रस्ट्रेशन (तनाव) को अगर ख़राब स्थिति का साथ मिल जाए तो ज़िंदगी वाकई भयावह होती है, सुलझे हुए लोगों के लिये भी। रिश्तों में और ज़िंदगी में अनगिनत परतें बन जाती हैं और इंसान ख़ुद बेबस रह जाता है। यही तो है गहराइयाँ!

इस फ़िल्म के रिश्ते सच हैं, रिश्तों में धोखेबाज़ी सच है, धोखेबाज़ी में टूटना सच है, अपनों संग बेवफ़ाई सच है, फ़ायदे के लिये रिश्ते का इस्तेमाल सच है, तनाव सच है। आपको पसंद न आयी हो लेकिन यह हमारे समाज की सच्चाई है।

ओटीटी पर फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद से फिल्मों के लिए केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड सर्टिफिकेट की अहमियत कुछ ज्यादा नही रह गई है क्योंकि घर में बच्चों द्वारा मोबाइल पर क्या देखा जा रहा है, इसमें माता-पिता का नियंत्रण सीमित है।

फ़िर भी ‘गहराइयां’ के दो दृश्य ऐसे हैं जिनके लिए फ़िल्म को ‘ए’ की जगह ‘यू-ए’ सर्टिफिकेट दिया जाना चाहिए था।

हम भारत में अभी भी सेक्स एजुकेशन पर ज्यादा बात नही करते और भारतीय परिवारों में लड़कियों द्वारा रिश्तों में की गई गलती पर पर्दा डाल दिया जाता है। दीपिका पादुकोण ने अपने बेहतरीन अभिनय के साथ फ़िल्म में ‘दो’ ऐसे दृश्य दिए हैं जिनके बारे में हर माता-पिता को अपनी समझदार होती बेटी को समझाना चाहिए।

गौर करने वाली बात यह है कि फ़िल्म में मुश्किल समय के दौरान अपनी बेटी को समझने वाला भी उसका पिता ही है।

फ़िल्म में मिडल फिंगर दिखाए जाने पर बोले जाने वाले शब्द की भरमार है पर आप सिर्फ़ उसकी वज़ह से बच्चों को साथ बैठा इस फ़िल्म को देखने से डरेंगे तो यह जान लीजिए कि बच्चों के बीच यह शब्द अब आम है।

यंग सोच रखने वाले यंग डायरेक्टर शकुन बत्रा इस बार यंग लोगों के लिए गहराइयां लेकर आए हैं। साल 2012 में निर्देशक के तौर पर अपनी पहली फ़िल्म ‘एक मैं और एक तू’ से शुरुआत करने वाले शकुन साल 2016 में ‘कपूर एंड सन्स’ से चर्चा में आए थे और अब उन्होंने ‘गहराइयां’ से हिंदी सिनेमा में खुद को साबित करने की कोशिश करी है।

त्रिकोणीय प्रेम सम्बन्ध विषय पर आधारित यह फ़िल्म दर्शकों को बीते कल से सीख लेने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

दीपिका ने फ़िल्म में अलीशा का किरदार निभाया है, जो एक योगा इंस्ट्रक्टर है। दीपिका का चेहरा हमेशा की तरह ताज़गी भरा लगा है और उसमें चार चांद लगाती है उनकी ड्रेस।

उन्होंने अपने किरदार को पूरी तरह से जिया है और सबसे ज्यादा प्रभावित भी करती हैं।

फ़िल्म की पटकथा कसी हुई है और एक घण्टा पूरा होने के बाद फ़िल्म की कहानी गति पकड़ती है, जो आख़िर तक दर्शकों को खुद से थामे रखती है।

जेन के किरदार में सिद्धान्त चतुर्वेदी दीपिका के बाद अपने अभिनय से सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं, फ़िल्म में उनकी ड्रेसों का चयन भी शानदार है।

 ‘गली ब्वॉय’ के बाद सिद्धान्त के पास यहां काफ़ी कुछ करने के लिए था और उन्होंने इस फ़िल्म से अपनी अलग पहचान बनाई भी है।

जेन की गर्लफ्रैंड बनी अनन्या पांडे ‘टीया’ के किरदार में हैं और अनन्या ने अपनी पिछली फिल्मों से काफ़ी अच्छा किया है।

धैर्य करवा और नसरुद्दीन शाह ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिकाओं के साथ न्याय किया है। धैर्य को हम इससे पहले ’83’ में देख चुके हैं। रजत कपूर को कैमरे के सामने बहुत वक्त मिला है और फ़िल्म में उनका होना भर ही काफ़ी होता है।

फ़िल्म के गीतों की बात की जाए तो सिर्फ़ ‘बेक़ाबू’ ही ऐसा गाना है जिसे दर्शक लंबे समय तक अपनी कार में सफ़र के दौरान सुनना पसंद करेंगे।

गहराइयां का बैकग्राउंड स्कोर बेहतरीन है, फ़िल्म देखते यह माहौल सा बना देता है। समुद्र की लहरों की आवाज़ बार-बार दिल को छूती जाती हैं।

फ़िल्म का छायांकन भी बेहतरीन है। मुंबई में समुद्र की खूबसूरती हो या होटल ताज, सब कुछ आंखों को रिझाता जाता है।

फ़िल्म की विशेषता यह है कि इसमें दीपिका और सिद्धान्त के बीच के करीबी दृश्य इस तरह फिल्माए गए हैं कि वह अश्लीलता की श्रेणी में नही लगते बल्कि उनके स्पर्शों से सीधे दिल में असर होता है।

फ़िल्म में नए ज़माने के रिश्तों को भी दिखाया गया है जो चेहरों पर हावभावों के साथ मोबाइल पर ही बनते हैं। ये अलग बात है कि साथी से वीडियो कॉल के दौरान किसी दूसरे के नोटिफिकेशन वाला सीन दिखा रिश्ते टूटने का कारण भी दिखा दिया गया है।

फ़िल्म अपने अंत में हैरान करती है।

गहराइयां फ़िल्म में सिर्फ एक कमी ही है, जो इसके हिट न होने का कारण भी बनेगी। वह यह कि इसमें अंग्रेज़ी में बोले गए ‘ऑलवेज चूस टू मूव ऑन’, ‘वॉट्स योर टाइप’ जैसे कुछ संवाद शामिल हैं।

इन्हें हिंदी में प्रभावी ढंग से पेश कर हिंदी सिनेमा के आम दर्शकों के ज्यादा क़रीब पहुंचा जा सकता था।

‘जब कोई तुम्हारे बारे में न सोच रहा हो न खुद को अपने बारे में सोचना पड़ता है’ संवाद इसका उदाहरण है।

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