What is gravity? आसान हिन्दी में

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Ashfaq Ahmad
कलमघसीट आदमी हूँ जिसने जिंदगी में अगर कोई चीज़ ढंग से सीखी है तो बस यही है!
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समय (Time) के बाद यह भी बहुत Complicated चीज है। गुरुत्वाकर्षण किसे कहते हैं? आम तौर से आसान हिन्दी में इसे समझना और समझाना दोनों ही मुश्किल है। चलिये, फिर भी Gravity Meaning In Hindi में यहां समझने की थोड़ी सी कोशिश करते हैं।

What is gravity? – Gravity Meaning In Hindi

What is gravity? ज्यादातर लोग इसे सिर्फ इस हद तक समझ पाते हैं कि हर पिंड में [उदाहरणार्थ: पृथ्वी {Earth}] एक चुंबकीय शक्ति (Gravitational force) होती है जो अपने आसपास की चीजों को अपने से बांध कर रखती है, यह कम या ज्यादा भी हो सकती है, जैसे पृथ्वी की 9.8 लगभग है तो बृहस्पति (Jupiter) की 24.79 है, इसे मीटर पर स्क्वायर सेकेंड से मापा जाता है। ब्रह्माण्ड (Universe) में हर वह ऑब्जेक्ट जो कुछ न कुछ मास रखता है, उसमें Gurutvakarshan (Gravity) होती है और हर भारी ऑब्जेक्ट अपने से हल्के ऑब्जेक्ट को अपनी तरफ खींचता है।

आम धारणा के मुताबिक़ यह ब्रह्मांड की चार आधारभूत फोर्सेज में से एक है। लेकिन अब इस धारणा को चुनौती मिलने लगी है और हो सकता है कि अगले एक दो दशक में इसे पैदा की जा सकने वाली फोर्स के रूप में स्थापित कर दिया जाये जो किसी तरह की एन्ट्रॉपी के अगेंस्ट पैदा होती है। न्यूटन को इसकी पहचान के जनक के रूप में जाना जरूर जाता है लेकिन सही मायने में इसे आइंस्टाइन ने ही एक हद तक पूर्णता प्रदान की थी। यह न सिर्फ अन्तरिक्ष को प्रभावित करती है, बल्कि Time पर भी सीधा असर डालती है। मतलब किसी पिंड की Gravity पृथ्वी से सौ गुनी हो तो पृथ्वी के मुकाबले सौ गुना ज्यादा आकर्षण पैदा करेगी और इसकी वजह से आसपास का बदलाव बेहद शिथिल गति से सम्पन्न होगा। जिसे Gravity Meaning In Hindi में हम कह सकते हैं कि पृथ्वी के मुकाबले वहां समय बेहद धीमा होगा।

What is gravity? Kaise Aur Kyon?

इसका मुख्य आधार है डेंसिटी यानि घनत्व, यह कैसे तय होता है? यह तय होता है वाल्यूम और द्रव्यमान (Mass) से। यानि किसी वॉल्यूम में कितना द्रव्यमान (Mass) है, उससे घनत्व (Density) तय होगी।

उदाहरणार्थ

एक क्रिकेट स्टेडियम में 22 खिलाड़ी खेल रहे हैं। दूसरे क्रिकेट स्टेडियम में भरे हुए ग्राउंड में कोई Rock concert हो रहा है, यहाँ स्टेडियम वॉल्यूम है और वहां मौजूद लोग द्रव्यमान (Mass) तो एक ऑब्जेक्ट के तौर पर खेल वाले स्टेडियम की Density कम होगी और शो वाले स्टेडियम की Density बहुत ज्यादा होगी। ज्यादा डेंस Stadium ज्यादा Gravity भी पैदा करेगा। किसी पिंड को वॉल्यूम मानेंगे तो उसे मनाने वाले मैटर या Atom को Mass।

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इसे पानी के जरिये समझ सकते हैं, एक किलो का बांट लीजिये, और एक किलो वजन की कोई लकड़ी, दोनों को पानी में डालिये। समान वजन होते हुए भी लकड़ी तैर जायेगी और बांट डूब जायेगा.. क्यों? क्योंकि डेंसिटी मैटर करती है, बांट यानि कम जगह में ज्यादा Atoms और लकड़ी यानि ज्यादा जगह में कम Atoms. दस लोगों के खड़े हो सकने लायक कमरे में मात्र चार लोग खड़े होना और उसी कमरे में सौ लोगों को घुसा देना… यह मॉडल है डेंसिटी का। यानि अगर आप एक विशाल समुद्र का प्रबंध कर सकें तो अपने सोलर सिस्टम के दूसरे सबसे बड़े ग्रह शनि को भी उसमें तैरा सकते हैं क्योंकि शनि की डेंसिटी (0.687 ग्राम पर क्यूबिक सेंटीमीटर) पानी से कम है।

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Gravity

एक सेंटीमीटर के क्यूब में आप जितना पानी भरेंगे वह एक ग्राम ही होगा!

पानी की डेंसिटी एक ग्राम पर क्यूबिक सेंटीमीटर होती है, यानि एक सेंटीमीटर के क्यूब में आप जितना पानी भरेंगे वह एक ग्राम ही होगा। पृथ्वी पर सबसे डेंस मटेरियल ऑस्मियम है जो लोहे से भी तीन गुना भारी होता है यानि एक ही साईज शेप के आप ऑस्मियम (Osmium) और लोहे (Iron) के एक किलो के बांट बनायें तो ऑस्मियम के एक बांट के बराबर वजन पाने के लिये लोहे के वैसे ही तीन बांट लगेंगे। अब यूनिवर्स के हिसाब से देखें तो सबसे डेंसर ऑब्जेक्ट वाईट ड्वार्फ स्टार, न्यूट्रान स्टार और ब्लैकहोल होते हैं जो किसी तारे के मरने पर बनते हैं।

सूर्य के आकार का कोई तारा जब परमाणु संलयन Nuclear Fusion के खत्म होने पर मरता है तो वह अपने अंदर के सभी एटम्स को ग्रेविटी की वजह से अंदर ही समेटना शुरू कर देता है, कोई भी परमाणु अंदर से 99% खाली होता है जिसके अंदर का खालीपन उस कंप्रेसन की अवस्था में खत्म होने लगता है और अंदर मौजूद प्रोटान, न्यूट्रान और इलेक्ट्रान और पास होने लगते हैं। इससे तारे का वाल्यूम बेहद कम हो जाता है और द्रव्यमान (Mass) वही रहता है जिससे उसकी Gravity बढ़ जाती है।

इसे ही वाईट ड्वार्फ स्टार कहते हैं जबकि अपने सूर्य से बीस गुना भारी तारा जब अपनी कोर पर कोलैप्स हो कर अंतिम हद तक कंप्रेस्ड हो कर सुपरनोवा विस्फोट करता है तो संभावना इस बात की रहती है कि बीस से तीस गुना भारी तक भारी है तो न्यूट्रान स्टार बनेगा और उससे ज्यादा द्रव्यमान (Mass) वाला हुआ तो Black Hole बन जायेगा।

एक चम्मच मैटर का वजन कई खरब किलो हो सकता है

अब इन न्यूट्रान स्टार्स की डेंसिटी इतनी होती है कि एक चम्मच मैटर भी अगर किसी प्लेनेट पर गिरे तो सुराख करता निकल जायेगा यानि एक चम्मच मैटर का वजन भी कई खरब किलो होगा। पृथ्वी के सबसे पास देखें तो PSR J0108-1431 नाम का न्यूट्रान स्टार है जिसका डायमीटर 25-20 किलोमीटर ही है लेकिन इसकी डेंसिटी 1000 खरब  ग्राम पर क्यूबिक सेंटीमीटर है। अगर इसे उठा कर हम अपने सोलर सिस्टम में रख दें तो तुरंत पूरे सोलर सिस्टम को खा जायेगा, सूर्य तक इसके ग्रेविटेशनल फोर्स से नहीं बच सकता। इससे ज्यादा डेंस बस Black Hole ही होता है जिसमें सारा द्रव्यमान (Mass) एक सिंगुलैरिटी पर इकट्ठा होता है जिसका कोई वॉल्यूम ही नहीं होता, इसलिये यह ब्रह्मांड की सबसे डेंसर, सबसे बड़ी (Massive) चीज होती है।

वैसे ब्रहमाण्ड (Universe) की डेंसिटी क्या है जो यहाँ कोई ग्रेविटी ही नहीं और चीजें बस तैर रही हैं… इतनी कम कि आप हैरान रह जायेंगे। इस यूनिवर्स का जो Mass (सभी प्रकार के पिंड) है उसके हिसाब से जितना आकार (वॉल्यूम) है वह ठीक ऐसा है जैसा पचास हजार की क्षमता वाले स्टेडियम में मात्र चार दर्शक बैठे हों। यानि एक सेंटीमीटर की क्यूब में आप यूनिवर्स लेंगे तो मात्र पांच एटम आयेंगे जबकि उतने ही क्यूब में लिये पानी में टेन टु द पावर ट्वेंटी थ्री (एक के बाद तेईस जीरो) एटम्स होते हैं, यानि शुद्ध भाषा में खरबों एटम्स।

What is gravity? आपके लिए इसका क्या महत्व है?

इसे Gravity Meaning In Hindi के जरिये तीन तरह से समझ सकते हैं कि किसी न्यूट्रान तारे जैसे डेंस ऑब्जेक्ट की तरफ आप जाते हैं तो इसकी जद में आते ही यह आपको अविश्वसनीय गति से अपनी ओर खींचेगा, और आपके परखच्चे उड़ा देगा और अगर किसी सुरक्षित टेक्निक से इसके सर्फेस पर लैंड भी कर जाते हैं तो तत्काल जमीन से ऐसे चिपक जायेंगे जैसे आपके ऊपर सौ हाथी लाद दिये गये हों। आपके एटम्स टूट जायेंगे और बिना किसी दिखने वाले दबाव के ही आप पापड़ की तरह जमीन से चिपक जायेंगे। इसका यह मतलब भी होता है कि किसी जूपिटर जैसे ज्यादा Gurutvakarshan वाले प्लेनेट पर भी लैंड होते ही आपके परखच्चे उड़ जायेंगे।

और अगर प्लेनेट की Gravity हमारे आसपास हो तो? किसी कम Gravity वाले सर्फेस पर आप का वजन बहुत कम हो जायेगा, संतुलन बनाने में मुश्किल होगी, चलने के बजाय जंप करेंगे तो देर सवेर Evolution होगा और दुम उग सकती है तथा वजन बढ़ाने के चक्कर में साईज भी बढ़ जायेगा और उम्र और एबिलिटी भी… इस प्रोसेस को मेरी किताब इनफिनिटी में भी पढ़ सकते हैं। थोड़ी ज्यादा Gravity वाले प्लेनेट पर आपका वजन बढ़ जायेगा, खड़े होना त्यागना पड़ेगा और Evolution की सूरत में अगली नस्लें चौपाये के रूप में पनपेंगी जो जमीन के नजदीक रहें, या रेंगने वाली प्रजाति के रूप में भी Evolved हो सकते हैं।

Gravity Meaning In Hindi – को समझने के लिए एक मॉडल बनाइये!

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एक सस्ते साइंटिस्ट वाले अंदाज में समझना चाहते हैं तो एक साईज के दो डिब्बे लीजिये, नाम रखिये लोल, लाफ.. अब प्लास्टिक बॉल से उन्हें भरिये। एक में ऐसे ही और दूसरे में बॉल्स फोड़ कर, किसी हथौड़े से क्रश्ड कर के। आप पायेंगे कि दोनों डिब्बे एक जैसे और समान रूप से भरे हैं लेकिन लोल में दस ही बॉल्स आ पाईं जबकि लाफ में सौ से ज्यादा और लोल के मुकाबले लाफ का वजन काफी बढ़ गया। यही डेंसिटी है.. लाफ का Mass ज्यादा है तो वह ज्यादा Gurutvakarshan पैदा करेगा जबकि लोल की ग्रेविटी काफी कम होगी।

What is gravity? यह Space व Time पर कैसे असर डालती है?

यह Gravity स्पेस या टाईम पे कैसे असर डालती है, इसे सस्ते Model से समझने के लिये एक चादर हवा में तानिये, तीन अलग जगहों पर प्लास्टिक Ball, लेदर Ball और एक लोहे की Ball डालिये। आप देखेंगे कि सभी Balls चादर में अलग-अलग गहराई के गड्ढे बना रही हैं। अब छर्रों के आकार की ढेरों गोलियां पूरी चादर पर बिखेर दीजिये.. प्लास्टिक Ball के पास सबसे कम गोलियां इकठ्ठा होंगी और लोहे की Balls के पास सबसे ज्यादा। यह स्पेस को प्रभावित करना है.. यानि यह हमारे सौर मण्डल (Solar System) में Jupiter जैसे बड़े ग्रह (Planet) के होने जैसा है जो अन्तरिक्ष (Space) से आने वाले ज्यादातर आवारा पिंडों को अपने आकर्षण (ज्यादा Gravity) से अपनी ओर खींच लेता है और पृथ्वी को एक अदृश्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

अब चादर को कंपन दीजिये या एक Side से हवा कीजिये तो पायेंगे कि Plastic Ball के पास वाली गोलियां तत्काल और ज्यादा प्रभावित हुईं जबकि Iron Ball के पास वाली गोलियां सबसे कम ऐसा क्यों? क्योंकि उसका आकर्षण बल ज्यादा Strong है, वह अपने आसपास के वातावरण में होने वाले परिवर्तन को लगभग थामे हुए है। यह परिवर्तन समय है जो पिंड के आसपास मौजूद वातावरण में होने वाले परिवर्तन की गति के हिसाब से कहीं तेज चल रहा है तो कहीं धीमा और इस तरह से Gravity समय को भी प्रभावित कर रही है। किसी Black Hole के आसपास समय इसीलिये बेहद धीमा होता है और अंदर लगभग थमा हुआ।

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