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जानिए नास्तिक होना क्यों जरूरी है?

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Shakeel Prem
Shakeel Prem
इंसान बनने की प्रक्रिया में हूँ!

Nastik Hona Kyon Jaruri Hai? – इस में कोई शक नहीं कि नास्तिकों को लेकर बे-सिर पैर कि बातें आपने भी बहुत सुन रखी होंगी। तो अब यथार्थ से परिचित हो लीजिये। और जानिए कि नास्तिक होना क्यों जरूरी है? और नास्तिक होने के फायदे क्या हैं?

नास्तिक होना क्यों जरूरी है?

वो कहते हैं न कि बीमारी जब बढ़ती है तो इलाज के साधन भी पैदा हो जाते हैं। महामारी पैदा होती है तो उसके निदान करने वाले चिकित्सक भी सामने आते हैं। ठीक वैसे ही जब जब धरती पर धर्म और Ishwar के नाम पर पाप और पाखंडों का साम्राज्य खड़ा होता है तब तब उन गिरोहों को बेनकाब करने के लिए Nastik पैदा होते रहे हैं। इसलिए यह कहा जाए कि नास्तिकता का अस्तित्व धार्मिक गिरोहों के ईश्वरीय भ्रमजाल पर टिका है।

धरती पर जब तक आस्था और विश्वासों के खोल में सड़ी-गली मान्यताओं रिवाजों द्वारा इंसानियत का बलात्कार होता रहेगा, तब तक नास्तिकता का अस्तित्व बना रहेगा। जब तक धार्मिक अज्ञानता के अंधकार में मानवता को धकेला जाता रहेगा, तब तक नास्तिक पैदा होते रहेंगे।

यहां बताते चलें कि Nastik को English में Atheist कहते है!

Nastik Hona Kyon Jaruri Hai? क्योंकि भारत में नास्तिकता की परंपरा बहुत पुरानी रही है। और यहीं नहीं दुनिया के प्रत्येक कोने में ऐसे महान Nastik पैदा हुए हैं जिन्होंने मानवता को धार्मिक जहालत से मुक्त करवाने का बीड़ा उठाया है। आइये आगे जानते हैं भारत के महान नास्तिकों को!

भारत महान नास्तिकों का देश है!

भारत के प्राचीन नास्तिकों में गौतम बुद्ध, महर्षि कपिल, अष्टावक्र, पतंजलि, महावीर जैसे लोगों आते हैं। इनके बाद की श्रेणी में स्वतन्त्रता सेनानी शहीद भगत सिंह को भी जोड़ा जाता रहा है। भारत में पश्चिम के कई नास्तिक लेखक भी बहुत पसंद किए जाते हैं। लेकिन इन सब में से बुद्ध का अपना कोई जवाब नहीं है, उन्हें हमेशा से एक शांति पूर्ण नास्तिक माना जाता रहा है। इसलिए आपका नास्तिक होना जरूरी है!

मानवता को धार्मिक जहालत से मुक्त करवाने के संघर्ष में कई महान नास्तिकों को शहीद होना पड़ा कई महान नास्तिकों को कारावास में जिंदगी गुजारनी पड़ी और कई नास्तिकों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा फिर भी मानवता के प्रहरी और पाखंडों के दुश्मन ईश्वर विरोधी इन महान नास्तिकों ने हिम्मत नही हारी और अपने महान बलिदानों से भविष्य के नास्तिकों को प्रेरणा देते रहे। इसलिए आपका नास्तिक होना जरूरी है!

नास्तिक होना क्यों जरूरी है!

क्यों विश्व के 16% लोग आज नास्तिक हो गए?

आखिर विश्व के 16% लोग नास्तिक क्यों हो गए? ऐसे क्या कारण हैं जिस की वजह से ये आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं, जो कथित धार्मिक गिरोहों की पोल खोलने वाले हैं।

सभी धार्मिक दावा करते हैं कि धर्म लोगों की बराबरी, प्रेम, परोपकार, मन की शुद्धता आदि के लिए हैं। वे यह भी कहते हैं कि धर्म ईश्वर के नज़दीक जाने का ज़रिया है। साथ ही यह एक बेहतर जीवन तथा मरने के बाद भी कई चीज़ें मुहैया कराता है। जबकि, यह सिर्फ सब वादे हैं। आप भी जानते हैं कि जीवन में धार्मिक बने रहने से ऐसा कुछ नहीं होता है।

Why is atheism necessity?

ऐसा सिर्फ बताया जाता है कि कोई भी धर्म राज करने के उद्देश्य से नहीं बल्कि मानवता की भलाई करने के लिए शुरु किये गए हैं। लेकिन व्यवहार में ऐसा कहीं है नहीं। आज The necessity of atheism इसलिए बढ़ रहा है, क्योंकि धर्म के नाम पर तरह-तरह के पागलपन हो रहे हैं। हर तरफ धार्मिक प्रचार से लोगों को अपने धर्म में शामिल करने की होड़ सी मची है।

नास्तिकता जरूरी क्यों है?

  • कौन सा धर्म सबसे पुराना है?
  • कौन सा धर्म सबसे अच्छा है?
  • किस धर्म को मानने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है?
  • किस धर्म के लोग सड़कें अधिक जाम करते हैं?
  • किस धर्म के लोग ज़्यादा शोर मचाते हैं?
  • किस धर्म के लोगों के ज़्यादा इबादतगाह हैं?

आप अजीब-अजीब से सवाल पूछते रहते हैं। भाई यहां सिर्फ प्रतिद्वंद्विता हैं। Necessity atheism instead of competition…!

धर्म सत्ता को बरकरार रखने का औज़ार मात्र है!

धर्म के दावे और उनके मानने वाले लोगों के व्यवहार में बहुत फर्क है। वह इसलिए क्योंकि धर्म वास्तव में सत्ता की भूख के लिए और सत्ता को बनाए रखने के लिए चलने दिया जा रहा है।

कभी लोगों को गुलाम बनाने के लिए ईसाई मिशनरियों ने धर्म का सहारा लिया और औपनिवेशिक दासता को बढ़ावा दिया। कभी धर्म के नाम पर युद्ध कर लोगों की हत्याएं की गई और तो और वहीं धर्म के नाम पर ही आत्मघाती तैयार किये जाते हैं।
आप भारत में ही देख लें, यहाँ मंदिर-मस्जिद को बनाने को लेकर कितना पागलपन है। क्या मंदिर की मांग रखने वालों में से किसी को स्कूल या चैरिटी हॉस्पिटल खोलने के लिए पागल होता देखा है, आपने? नहीं ना, आज भारत में ही लगभग 25 लाख आराधना स्थल हैं और स्कूल केवल 15 लाख। जैसा कि मैने कहा है कि ये सब कम्पटीशन है, कम्पटीशन।

अपनी संख्या बढ़ाने के लिए, मंदिर-मस्जिद खड़ी करने का और अपने धर्म को ऊँचा साबित करने लिए।

दुनिया भर के ढोंग, आडम्बर, कुरीति, महिलाओं को दोयम दर्जा देना आदि सब इसी की आड़ में तो पनपाए जाते हैं।

धर्म के नाम पर ही ये देश टूट चुका है।

और आज भी उसी धर्म की बात कर के ही राजनीति जारी है।

  • पाकिस्तान का विभाजन धर्म के आधार पर ही हुआ था। उस विभाजन के दौर में जिसमें हज़ारों लोग मरे थे।
  • राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के विवाद ने कितनों की जान ले ली थी ये कौन नहीं जानता…?
  • ज़्यादातर दंगे किस वजह से होते हैं? धर्म कि वजह से!

आज देखिये, हिन्दू-मुस्लिम के बीच भेद की दीवार और भी बढ़ चुकी है, जिसे नेता वोट की राजनीति की खातिर बढ़ाते ही जा रहे हैं। मुझे आशा है, भविष्य में शायद धर्म इस रूप में राज नहीं कर पाएंगे।

गौर करिए तो आज़ इन्टरनेट और सोशल मीडिया के दौर में ज़्यादातर युवा, भक्त बनना त्याग रहें हैं और अंधश्रद्धा से वे नास्तिकता, संशयवादी, धर्मनिरपेक्षता, एको-धर्म, इंगेज्ड स्पिरीचुअलिटी (Engaged Spirituality) आदि की तरफ बढ़ रहे हैं। इसलिए संभव है कि नास्तिक या बिना धार्मिक ठप्पेवाले लोगों की संख्या सर्वाधिक होगी। वैसे तो आज विश्व में उनकी संख्या 16% पहुंच गई है।

नास्तिक होने के फायदे – 15 फायदों की लिस्ट

यहां पढ़िये नास्तिक होने के फायदे क्या-क्या है!

  1. किसी भूत, प्रेत, पीपल बरगद से डर नहीं लगता।
  2. पूजा-पाठ, कथा-प्रवचन में चवन्नी खर्च नहीं होती।
  3. अपने किये अच्छे कार्य का क्रेडिट खुद लेता हूँ।
  4. गाय और कुत्ते पर एक समान प्यार आता है।
  5. सांप बिच्छू तक से डर खत्म हो गया है प्यार बढ़ गया है।
  6. गलती को हरि इच्छा मान कर आगे दोहराने से परहेज करता हूँ।
  7. 11, 21, 51 जैसी शुभ संख्याओं से अब कुछ लेना-देना नहीं।
  8. ज़िन्दगी मस्ती से कट रही है छोटी-छोटी खुशियों में मजा लेते हुए।
  9. गंदगी और बदबू भरे गंगा जल में नहाने की मजबूरी नहीं झेलनी पड़ती।
  10. सुबह-सुबह अखबार में राशिफल देख कर अपने दिन का शेड्यूल नहीं बनाना पड़ता।
  11. कोई भी शुभ काम शुरू करने के लिए सत्य नारायण की कथा सुन कर अनुमति नहीं लेना पड़ता।
  12. नरक में जाने के डर से हर चबूतरे, देवोत्थान, लाल झंडा लगाए जगह पर सर नहीं झुकाना पड़ता।
  13. किसी कार्य की संभावित सफलता के लिए अब किसी देवी-देवता की पूजा करने की जरूरत नहीं पड़ती।
  14. बिल्ली के रास्ता काट जाने पर घर से निकलते ही छींक आने पर या खाली बाल्टी देख कर वापस नहीं लौटना पडता।
  15. सबसे खास बात यह कि किसी को भी जाति, लिंग, नागरिकता, रंग, क्षेत्र, अमीरी गरीबी के आधार पर अलग नहीं समझता। इंसान को सिर्फ इंसान समझता हूँ।

Shakeel Prem का Nastik Hona Kyon Jaruri Hai का ये Video नास्तिकता के भूत, वर्तमान और भविष्य पर आधारित है जो आपको बताएगा कि नास्तिक होना क्यों जरूरी है?

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