धरती का पहला इंसान कौन था?

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जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें शिद्दत से सुधार की जरूरत है!
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Mythological view के हिसाब से विश्व के सभी धर्मों में (first human on earth) धरती का पहला इंसान एक ही जैसी उत्पत्ति से प्रकट हुए हैं।

First man and woman on earth in hindi

यहूदी, ईसाई उनको “Adam” कहते हैं तो मुस्लिम उनको “आदम” तो सनातन धर्म में उनको “मनु” कहा गया है। Adam की पत्नी “Eve” को माना गया है तो “आदम” की पत्नी को “हव्वा” और ऐसे ही “मनु” की पत्नी को “शतरूपा” को कहा गया है!

एडम या आदम के धरती पर अवतरित होने का समय लगभग 9000 साल पहले का माना जाता है तो कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार ब्रम्हा और उनकी पुत्री सरस्वती से जन्में मनु आज से लगभग 19,700 साल पहले धरती पर आए थे।

कुछ मान्यताओं के अनुसार मनु का नाम “स्वयंभुव मनु” था, जिनके संग प्रथम स्त्री थी शतरूपा। ये ‘स्वयं भू’ (अर्थात स्वयं उत्पन्न: बिना माता-पिता के उत्पन्न) होने के कारण ही स्वयंभू कहलाये। इन्हीं प्रथम पुरुष मनु और प्रथम स्त्री शतरूपा की सन्तानों से संसार के समस्त मानवों की उत्पत्ति हुई। मनु महाराज ने ही “मनु स्मृति” लिखी।

दूसरी तरफ Adam या आदम के बारे में भी कहा जाता है कि यह किसी माँ-बाप से नहीं जन्में बल्कि इनको ईश्वर ने बनाया और जान डाल दी।

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बाइबल में भी Adam को ईश्वर के शरीर की परछाई ने जन्म लिया बताया गया है। बाइबल में इस परछाई का नाम एडेम दिया गया है। बाइबल में एडेम के जन्म पर एक वाक्य लिखा है “Man was created in the image of his Creator” जिसका मतलब होता है कि भगवान की परछाई में मनुष्य ने जन्म लिया है।

तो इस्लाम में आदम को अल्लाह ने मिट्टी पानी से बनाया और उसमें जान डाल देने की बात है जो जन्नत में गेहूँ ना खाने के आदेश को तोड़ देते हैं और उनको दंडित करने के लिए ज़मीन पर उतार दिया जाता है।

कुछ मान्यताओं के अनुसार “मनुस्मृति” पंडित पुश्यमित्र शुंग के शासन काल में लिखी कही जाती है और ऐसा माना जाता है कि वेद-उपनिषद पर आधारित हिन्दू धर्म में पौराणिक कहानियाँ उसी काल में गढ़ कर स्थापित की गयी हैं। महाभारत और रामायण भी उसी दौर में लिखी गयीं पौराणिक कथाएँ ही मानी जाती हैं।

इसके पक्ष में तर्क यह है कि यहूदियों की “तालमूद” ईसा से 200 साल पहले लिखी गयी थी और उसी समय भारत में पंडित पुश्यमित्र शुंग का शासन था।

मनुस्मृति और यहूदियों की किताब “तालमूद” 99% लगभग एक जैसी है।

कुल मिलाकर तथ्यात्मक रूप से धरती पर आए प्रथम मानव को अधिकतम 19,700 साल पहले का माना जा सकता है।

आस्था कहती है कि पुरुषोत्तम राम त्रेता युग के अर्थात 12.5 लाख साल पहले के थे, श्रीकृष्ण 8 लाख 64 हजार पूर्व में द्वापर युग के माने जाते हैं।

समाज में दो विपरीत तथ्य को एक समान आस्था के आधार पर मान लिया जाता है। आस्था एक ऐसी चादर है जिससे सब तियाँ-पाँचा छुपाया जाता है।

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ऐसा माना जाता है कि आज से कोई 5000 साल पहले दुनिया में आई बाढ़ या जल-प्रलय से सभी मानव सभ्यता और बहुत हद तक जीव-जन्तु का विनाश हो गया था। और इसके बाद नयी मानव सभ्यता ने जन्म लिया था जिसका प्रमाण “मोहन जोदाड़ो और हड़प्पा” से मिलता है। यह प्रमाणिक तथ्य है।

एक और तथ्य है कि हज़रत नूह अलैहेस्सलाम (इस्लाम में) या नोआ (Noah) इब्राहीम में श्रद्धा रखने वाले धर्मों (ईसाईयत, यहूदी और इस्लाम) के एक प्रमुख संदेशवाहक और पूर्वज थे जो जलप्रलय के समय न्यायोचित प्राणियों को बचाने के लिए जाने जाते है। जिस नाव पर सवार होकर सब प्राणी बचे उसको नोआ की नाव (Ark of Noah, कश्ती नूह) नाम से जाना जाता है।

मनु महाराज की कहानी इस्लामिक पैगंबर हज़रत नूह अलैहेस्सलाम से मिलती है। हज़रत नूह अलैहेस्सलाम हज़रत आदम अलैहेस्लाम की नौवीं पुश्त से थे।

सारी दुनिया आर्किलाजिकल सर्वे आफ इंडिया और युनेस्को जैसी संस्थाएँ यह मान चुकी हैं कि मानव सभ्यता में भवन निर्माण 5000 साल पहले ही अर्थात ईसा पूर्व 3000 साल पहले प्रारंभ हुआ और इसके सबूत “मोहन जोदाड़ो और हड़प्पा” की सभ्यता से मिलता है।

अर्थात ईंट, गारे और पत्थर से भवन निर्माण हड़प्पा और मोहन जोदाड़ो की सभ्यता से पहले कहीं नहीं मिलता है जबकि सारी दुनिया ही लगभग खोद दी गयी है। अर्थात 5000 साल पहले ना कोई महल था ना राज दरबार, ना कोई हवेली थी ना ईंट, पत्थर और गारे से बने भवन का निर्माण था।

खाना-ए-काबा का निर्माण भी 5000 साल के अंदर ही ईसा से 2500 साल पहले का है अर्थात करीब 4500 साल पहले हज़रत इब्राहिम अलैसेस्सलाम द्वारा फिर से उस बुनियाद पर “खाना-ए-काबा” का निर्माण किया गया जो 5000 साल पहले आई उस बाढ़ में बह गया था।

सऊदी अरब के जेद्दा स्थित “मकबरतुन हौव्वा कब्रिस्तान” में आदम अलैहिस्लाम की पत्नी “होव्वा” की कब्र है तो हज़रत आदम अलैहिस्लाम की कब्र “खाना ए काबा” के सामने “जबले अबू कुबैस” पहाड़ के नीचे बताई जाती है।

कहते हैं कि हव्वा के कब्र की लंबाई उस वक्त के लोगों की लंबाई बताती है।

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