15.1 C
Delhi

Rakesh Kayasth | Today’s famous author biography

जरूर पढ़े!

DG
जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें शिद्दत से सुधार की जरूरत है!

About: Rakesh Kayasth- मौजूदा पीढ़ी के उन चंद लेखकों में शामिल हैं, जो व्यंग्य की ताकत और व्यंग्यकार होने की जिम्मेदारी को ठीक से समझते हैं। बोलती बतियाती भाषा में बड़ी कहानी कहने का हुनर राकेश कायस्थ को मौजूदा दौर के लोकप्रिय लेखकों की कतार में शामिल करता है।

कुछ चुभते, गुदगुदाते, मुँह चिढ़ाते और आईना दिखाते शब्दों से बनती हैं ऐसी तस्वीरें, जिन्हें बार-बार देखने का मन होता है। राकेश कायस्थ का लेखन अर्थपूर्ण शब्दों से बनी ऐसी ही तस्वीरों का कोलाज है।

राकेश कहते हैं कि-

“जीवन विचित्र विसंगतियों का कोलाज है!
जो चाहो, होता है ठीक उसका उल्टा”!!

~ राकेश कायस्थ

राकेश आगे बताते हैं कि- “पढ़ने-लिखने से भागता था, लेकिन पढ़ने-लिखने के धंधे में आ गया। नौकरी नहीं पत्रकारिता करना चाहता था, लेकिन पत्रकारिता कब नौकरी बन गई, पता ही नहीं चला। पत्रकारिता की मुख्य धारा में डेढ़ दशक तक बहने के बाद फिलहाल कुछ नया करने की कोशिश कर रहा हूं”।

"लेखक के तौर पर त्रासदी यह है कि जब भी मैंने कुछ गंभीर कहने की कोशिश की, दुनिया ने उसे व्यंग्य ही माना। जिस किसी के चरण पखारे, उसने घड़ों पानी डालने का इल्जाम लगाया। चाहता तो हूं मैं मक्खन लगाना, लेकिन न जाने क्यों कैसे लग जाती है, हमेशा मिर्ची"!

राकेश का मानना है कि-

“व्यंग्य ना तो संस्कारी होते हैं ना दरबारी!
टेढ़ापन ही व्यंग्य का असली संस्कार है”!

~ राकेश कायस्थ

अख़बार और पत्रिकाओं के लिए व्यंग्य लिखने का सिलसिला बरसों पुराना है। लेकिन लेखन का सबसे बड़ा हिस्सा टीवी कार्यक्रमों में खर्च हुआ है। टीवी पत्रकारिता के लंबे सफ़र में आजतक, तेज़ और न्यूज़ 24 जैसे चैनलों के कई लोकप्रिय व्यंग्य कार्यक्रमों की परिकल्पना, लेखन और निर्देशन इनके खाते में दर्ज हैं। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के साथ भी पुराना एक्स्ट्रा मैरिटल अफ़ेयर रहा है, जिसकी निशानियाँ मूवर्स एंड शेकर्स जैसे कुछ टीवी शोज़ में देखी गयी थी। सिनेमा, विज्ञापन और खेलों की दुनिया में गहरी रूचि रखने वाले राकेश कायस्थ Star Tv Network से भी जुड़े थे।

इनका क्रिएटिव कैनवास काफ़ी बड़ा है। न्यूज चैनलों पर राजनीतिक व्यंग्य आधारित कार्यक्रमों को विस्तार देने से लेकर, डॉक्युमेंट्री फ़िल्म मेकिंग और ‘Movers and Shakers’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों की पटकथा सरीखे कई काम खाते में दर्ज हैं।

मुख्यधारा की पत्रकारिता में लंबा समय बिता चुके राकेश ठेठ देहाती दुनिया से लेकर चकाचौंध भरी महानगरीय जिंदगी तक पूरे देश और परिवेश को समग्रता से समझते हैं। समय, समाज और सत्ता की विसंगतियों को देखने जो लेंस इनके पास है, वह विरल है।

Hindi Literature Books By Rakesh Kayasth

Rakesh Kayasth की 2015 में आई किताब ‘कोस-कोस शब्दकोश’ ने खूब चर्चा बटोरी थी। यथावत पत्रिका में पिछले पांच साल से चल रहा कॉलम बतरस भी काफी लोकप्रिय है।

Hindi Literature BooksPublisherPublication DatePrice
Rambhakt RangbaazHind Yugm, Noida7 November 2021199 रुपये
Prajatantra Ke PakaudeKissaGo1 January 2019N/A
Kos Kos ShabdkoshHind Yugm, Noida11 March 201590 रुपये

Author Updates

राकेश जी का चर्चित व्यंग्य संग्रह ‘कोस-कोस शब्दकोश’ और फैंटेसी नॉवेल ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’ के बाद ‘रामभक्त रंगबाज’ इनकी नई किताब है, जो शिल्प और कथ्य के मामले में पिछली रचनाओं से एकदम अलग है।

Rakesh Kayasth’s Book – Kos Kos Shabdkosh

इसे आप हिंदी की पहली मौलिक डिक्शनरी कहें, थिसॉरस, व्यंग्य निबंधों का संग्रह या कुछ और, लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करेंगे तो बिना खत्म किए छोड़ नहीं पाएँगे। कोस-कोस शब्दकोश हिंदी के सामाजिक-राजनीतिक परिवेश में इस्तेमाल होने वाले पचास प्रचलित शब्दों की निहायत ही अप्रचलित परिभाषाओं और व्याख्याओं की किताब है। परिभाषाएँ कुछ ऐसी हैं कि आप हँसी रोक नहीं पाएँगे या कई जगहों पर ठहर कर गहरी सोच में डूब जाएँगे। हिंदी के आम पाठक से बोलती बतियाती ये किताब सम-सामायिक विसंगतियों पर गहरी चोट करने के साथ भरपूर मनोरंजन भी करती है।

Rakesh Kayasth’s Book – Prajatantra Ke Pakaude

कुछ लोग इसे तीखा राजनीतिक व्यंग्य मान सकते हैं। लेकिन पढ़ने के बाद यह महसूस होता है कि ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’ हिंदी फिक्शन में फैंटेसी का एक नया फ्लेवर लेकर आई है। कहानी इतनी दिलचस्प है कि एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद इसे बीच में छोड़ पाना ना-मुमकिन है।

कहानी नोएडा की फिल्म सिटी में पकौड़े बेचने वाले रामभरोसे की है, जिसने ‘पकौड़ा क्रांति’ के ज़रिये दुनिया बदलने का सपना देखा था। लेकिन फ़िलहाल देश की तरह उसकी जिंदगी भी रामभरोसे ही थी। एक दिन किस्मत ने पलटा खाया और एक महापुरुष के दर्शन ने रामभरोसे को रातों-रात युगपुरुष बना दिया। भारत में पकौड़ा क्रांति हो गई और फिर वो दिन भी आया जब रामभरोसे इस देश का प्रधानमंत्री बन गया। चाय से पकौड़े तक समय का एक चक्र पूरा हुआ। रामभरोसे का सपना सचमुच सच साबित होता है और भारत दुनिया को पकौड़ा क्रांति के ज़रिये खुशहाली, अमन और भाईचारे का रास्ता दिखाता है। विश्वगुरू के महाशक्ति बनने की महागाथा है, प्रजातंत्र के पकौड़े

Prajatantra Ke Pakaude एक ऐसी अनोखी फैंटेसी है जिसकी कोई और मिसाल ढूंढना मुश्किल है। किताब आपको शुरू से आखिर तक गुदगुदाती है लेकिन बहुत गहराई से सोचने को मजबूर भी करती है।

कृशन चंदर के बाद लगभग खत्म हो चुकी हिंदी-उर्दू की फैंटेसी परंपरा को जिंदा करती यह किताब शुरू से अंत तक आपको चमत्कृत करती है। इसकी भाषा कहीं चुभती है तो कहीं गुदगुदाती है। किताब के कॉमिक सिचुएशन आपको लगातार लाफ्टर का इंजेक्शन लगाते हैं। किताब सम-सामयिक है लेकिन व्यंग्यात्मक शैली की गई किस्सागोई इसे समय की सीमाओं से परे ले जाती है।

Rakesh Kayasth’s Book – Rambhakt Rangbaaz

रामभक्त रंगबाज की कहानी में गहराई है लेकिन लहजे में ग़जब की क़िस्सागोई है। आरामगंज में कदम रखते ही आप समकालीन इतिहास की उन पेंचदार गलियों में खो जाते हैं, जहाँ मासूम आस्था और शातिर सियासत दोनों हैं। धार चढ़ाई जाती सांप्रदायिकता है लेकिन कभी न टूटने वाले नेह के बंधन भी हैं। अतरंगी किरदारों की इस अनोखी दुनिया में कभी हँसते तो कभी रोते अफ़साना कैसे गुज़र जाता है ये पता ही नहीं चलता।

Rakesh Kayasth’s satirical poem

Rakesh Kayasth’s Social Media Profile

दिल्ली की मुख्यधारा की पत्रकारिता में बरसों तक बहने के बाद आजकल मुंबई में किनारा मिला है, जहाँ राकेश अपनी पत्नी मनीषा और दो छोटे बच्चों अयन और अथर्व के साथ रहते हैं।

Facebookrakesh.kayasth.98
Instagramrakeshkayasth4
YoutubeRakesh Kayasth
TwitterRakeshKaya
E-mail[email protected]
- Advertisement -

More articles

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -