Neti | वेदों ने कहा – नेति (न इति = Not this)

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DG
जो धर्म डराए, जो किताब भ्रम पैदा करे, उसमें शिद्दत से सुधार की जरूरत है!
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Neti Neti (= न इति न इति)

“Neti संस्कृत का एक शब्द है जिसका अर्थ है ‘Not This, Not This’ या ‘यही नहीं, यही नहीं’ या ‘ये अन्त नहीं है, ये अन्त नहीं है”। अद्वैत दार्शनिकों में से एक थे आदि शंकराचार्य जिन्होंने नेति-नेति दृष्टिकोण की वकालत की थी।

(यहाँ गौर करिएगा, Ved से मेरा कोई विरोध नहीं है। विरोध ये है कि Ved को जप कौन रहा है? मेरा Ved की महानता पर भी कोई सवाल नहीं है। सवाल है कि ये कहा किसने हैं?

लोग जिनके नाम गिनाते हैं वो शिक्षक हैं… सरकार नहीं।

Ved जो कहता है… वो कह चुका है। उसी Ved से निकला है Neti Neti (= न इति न इति) मतलब आगे बढ़ो और खोजो… और जानों… कि ये अंत नहीं हैं, ये ‘इति’ नहीं है।

पर खोजा क्या है हमने? जाना क्या है हमने?

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हमने Ved से निकले Neti से कुछ सीखा ही नहीं, बस Ved तोते की तरह रटते रहते हैं। रटने और सीखने में क्या फर्क होता है। आपको अच्छी तरह पता होगा…!

वो डॉक्टर हैं… और भारत का विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री भी है। अब भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री, जो कि एक मेडिकल डॉक्टर भी है उसकी क्लीनिक में जो मेडिकल की मशीने हैं, क्या वो भारत में आविष्कृत हैं? वो कहां निर्मित की गईं हैं? और क्या उसे Ved के किसी पाठ से बनाया गया है?

मेडिकल यंत्र, विदेशियों का आविष्कार है!

वो मंत्री जो किताबें पढ़-लिख कर आज मेडिकल डॉक्टर बन गया, उन किताबों का ज्ञान क्या Vedas से आया? अमीबा से अमाशय तक की वो सारी जानकारी क्या दूसरे देशों के वैज्ञानिकों ने नहीं खोजे और बताएं हैं। क्या उनके ही ज्ञान को पढ़कर हमारे देश में दिल के मरीजों की धमनियों में वाल्व नहीं लगाए जा रहे? लेकिन क्यों ये वाल्व एक गरीब नहीं लगवा सकता है? क्यों मंहगा है वो भी इतना.. क्योंकि उसे किसी विदेशी ने खोजा, आविष्कार किया और बनाया है।

उस मंत्री के क्लीनिक ही नहीं… भारत के हर अस्पताल में उपयोग किया गया हर मेडिकल यंत्र, विदेशियों का आविष्कार है… भारत उसका बस एक मूर्ख उपभोक्ता की तरह इस्तेमाल कर रहा है।

और भारत में आविष्कार और खोज व शोध के लिए माहौल, हालात और परिस्थितियां निर्मित करने का DHARM जिस व्यक्ति का है वो विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री हजारों साल पहले ही एक्सपायर्ड हो चुके Ved को पकड़, उसका जाप कर रहा है।

Ved महान था, अब वो अतीत बन चुका है!

वेद को लिखने वालों ने ही उसके ज्ञान का एक्सपायरी डेट लिख दिया था Neti Neti कह कर।

CT Scan की मशीने, एक्सरे मशीनें, अल्ट्रासाऊंड… मामूली ग्लुकोमीटर भी… विदेशी आविष्कार और उत्पादन है। दवाएं… इलाज, बल्ब, कार, एक कलम और पेंसिल भी.! अपने चारों तरफ देखिए… आप Vedas के महान ज्ञान के सहारे जीवित हैं? या किसी और के ज्ञान की मेहरबानी और दया से? हमारे बच्चे जो रोटियां खातें हैं, वो गैस किसने खोजा? किसने उसे सिलेंडर में भरा और आपके घरों तक किसने पहुंचाया? Vedas ने? कि भारत से बाहर के देशों की तकनीक ने?

सवाल ये है कि

महान वेदों के अतीत वाले लोगों ने किया क्या है?

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वेदो ने सिखाया… ज्ञान दिया कि आगे बढ़ों, खोजो… और खोजो, पता करो कि ये संसार कैसे काम करता है? उससे अपना जीवन बेहतर करो।

हमने उसका पाठ रट लिया पर सीखा कुछ नहीं, सबक कुछ नहीं लिया।

इसीलिये हमारे यहां बच्चे अस्पताल में भी बिना ऑक्सीजन के मर जाते हैं। एम्स के बाहर सैंकड़ों मरीज फुटपाथ पर सोये रहते हैं। एम्स में सीटी स्कैन या एमआरआई के लिए छह महीने बाद का नंबर मिलता है, तो वो मरीजों को बाहर के किसी लैब से कराने का सुझाव देते हैं। बाहर सीटी-स्कैन एमआरआई बेहद मंहगा होता है… पांच से दस हजार का। एक गरीब आदमी जो फुटपाथ पर बीमारी लिए सोया है, वो कर्ज लेकर ये जांच कराता है और मर जाता है।

क्यों नहीं बनाया किसी भारतीय ने MRI मशीन ताकि वो भारत के लोगों के लिए सस्ता होता। 300 रूपये में हो जाती जांच। गरीबों को ये सुविधा और सहूलियत मिलती।

हमने सिर्फ़ सीखा है कि Ved महान है!

Ved ने सिखाया जिम्मेदारी उठाओ, रीढ़ सीधी करो, खुद अपने बल पर खड़े होकर आगे बढ़ो। और हमने सीखा Ved महान है कि वो बहुत अच्छी बातें करता है, कहता है। हमने उससे एक जरा भी सबक और ज्ञान नहीं सीखा।

तनिक सोचिए… एक दिन दुनिया भर के देश और कंपनिया अपना पेटेंट वापस ले भारत पर पाबंदी लगा दें कि भारत किसी भी विदेशी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करेगा तो… सुई से लेकर विमान तक आपका सब छिन जाएगा। और हम Vedas के साथ उसकी प्राथमिक शिक्षा पर खड़े भूखे मर रहे होंगे। ये जो अनाज है ना, वो विदेशी शोध से बने संकर बीजों से उपजते हैं। दूध देने वाली गायें विदेशी हैं। ट्रैक्टर विदेशी खोज और आविष्कार है… हर चीज यहां विदेशी तकनीक है और हमारा विज्ञान मंत्री वेद पढ़ रहा है।

हमारा कुछ योगदान नहीं और हमारे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री वेद उठा उसका जाप कर रहे हैं कि Ved अच्छी बातें करता है। अबे… जो बातें वो करता है उसको अमल में लाओ… आगे बढ़ों… खोजो तरक्की करो खुद अपने बूते, और फिर संसार की मदद करो। पर हम मदद करने नहीं… मदद के सहारे जीने के लिए बेगैरत रीढ़ हीन जीव हो गए हैं।

स्टीम इंजन… डीजल इंजन, पेट्रोल इंजन, अब गैस इंजन, हर तरह की तकनीक कहां से आई किसने आविष्कार किया? जिसकी जिम्मेदारी है अविष्कारों में…. भारत का योगदान तय करने और खोजों के लिए भारत में एक जमीन तैयार करने की… तो वो हमारे कर्णधार वेद पढ़ रहे हैं।

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बात Ved की नहीं है… बात है कि-

Ved पढ़ कौन रहा है? क्या उसका धर्म Ved पढ़ना है भी?

Ved जीने का तरीका सिखाता है। जीने का हुनर देता है। उस पर अमल करने का काम जनता करती है। यहाँ हजारों बरसों से Ved है फिर भी ये दुर्दशा क्यों है? हमारे ही जीवन में हमारा एक ढेला भी योगदान क्यों नहीं है।

आप बताते हैं, आइंस्टीन ने Ved पढ़ा था। तो भाई सापेक्षता का सिद्धांत भी उन्होंने ही दिया। हमारे पास तो हजारों बरसों से Ved है हमने क्या उखाड़ लिया? हम तो अभी भी चंद्रग्रहण से अशुद्ध हो रहे हैं।

हमने Vedas के रचयिता अपने पूर्वजों को शर्मिंदा किया है। उनके भरोसे का खून किया है। उन्होंने हमारे लिए लिखा कि ये ज्ञान अंत नहीं… इससे आगे भी खोजो, और भी बहुत कुछ है। और हमने उनके ही ज्ञान को अंत मान लिया। एक परजीवी की तरह दूसरों के थूके गए ज्ञान के भीख से हमारी जिंदगी कट रही है।

बात Ved की नहीं… बात है-

Ved का इस्तेमाल कैसे? क्या? और कौन कर रहा है?

Ved सरकार के हाथों में नहीं, तीसरी कक्षा के बच्चे के हाथ में होने की जरूरत है कि वो जीवन जीने के बुनियादी मूल्य सीख… उस पर अमल करना जाने, फिर बड़ा हो कर Vedas के ज्ञान में अपनी तरफ से खोज कुछ आगे जोड़े। ये काम Vedas को महान बताने से नहीं… उस पर अमल करने से होगा…!

~आनंद के कृष्ण

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